कृष्णवर्णी श्रृंखला का यह तृतीय खंड उस समय से आगे बढ़ता है जब विश्व सम्राट स्कंद समस्त वैभव और राज्यपद का परित्याग कर जंगल की ओर प्रस्थान करता है। यह उपन्यास मात्र एक यात्रा नहीं अपितु ऐसे दर्शन की अभिव्यक्ति है जिसमें संसार को शक्ति और प्रकृति के माध्यम से समझा जाता है। उपन्यास कृष्णवर्णी को जानने की तीव्र उत्कंठा जागृत करता है और जिसका बोध होने के उपरांत मात्र उस कृष्णवर्णी लिए जीवन जीना ही मनुष्य जाति का एकमात्र लक्ष्य है।
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