यह पुस्तक केवल एक पुस्तक नहीं बल्कि मेरे जीवन में घटित हुए एक साधारण व्यक्ति के असाधारण आध्यात्मिक परिवर्तन की सच्ची कहानी है। इस लेखन की प्रेरणा मुझे सीधे महावतार बाबा जी (चित्र पृष्ठ संख्या 5 पर) से प्राप्त हुई और उनके आदेश पर ही मैंने यह लेखनी प्रारंभ की। मैं स्वयं को मात्र एक माध्यम मानता हूँ शब्द मेरे नहीं हैं- वे बाबा जी की कृपा से मुझ तक पहुँचे हैं। इस पुस्तक में मैंने अपने जीवन की वास्तविक घटनाओं को उसी रूप में प्रस्तुत किया है जैसे वे घटी थीं। कुछ पात्रों के नाम गोपनीयता के कारण नहीं दिए गए हैं परंतु घटनाओं में कोई कल्पना या परिवर्तन नहीं किया गया है। मेरी यह कोशिश रही है कि मेरी जीवन-यात्रा के अनुभवों को इस तरह बाँधा जाए कि पाठक न केवल उससे जुड़ाव महसूस करें बल्कि उन्हें इससे प्रेरणा और आत्मिक लाभ भी प्राप्त हो।