क्षितिज के छोर तक कवयित्री पूनम माटिया का पाँचवा काव्य संग्रह है जो अंतस् में उठती हुई सागर-सी तरंगो को शब्दों के पंख लगाकर क्षितिज के छोर तक पहुँचाने का प्रयास करती दिखाई देती है.... इस संग्रह की रचनाएं....वैज्ञानिक दृष्टि....नवीन बिम्ब....प्राकृतिक सौन्दर्य....रिश्तों की बुनावट....परिवार....संस्कार....समाज....देश....विश्व को जोड़ते हुए मानवीय संवेदनाओं को आसान शब्दों में ढालकर काव्य की विविध विधाओं में पाठक से संवाद करती हैं....छेड़ती हैं....गुदगुदाती हैं....प्रेरित करती हैं क्यूंकि ज़िन्दगी रुकने का नहीं चलने का नाम है....