प्रस्तुत कृति में पुनः स्वर्णिम आभा की ओर लौटनें के विचारों का संकल्पना की गई। मैं श्रीमति नीता जैन मुम्बई से हूँ। मेरा बचपन एक छोटे से गाँव में बीता। मिट्टी की महक को आज महानगर में रहते हुए भी अनुभव करती हूँ। निराशा में एक टिमटिमाता दीपक आशा की किरण दिखाता है। इसी विचारों को कविता रूप यह संकलन है। श्रीमति नीता जैन मुम्बई