भारत के उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में कई वर्षों तक नरभक्षी बाघों और तेंदुओं का आतंक छाया रहा। ये खूंखार शिकारी सैकड़ों निर्दोष ग्रामीणों की जान ले चुके थे और पूरा इलाका भय के साए में जी रहा था। ऐसे कठिन समय में जिम कॉर्बेट – एक साहसी शिकारी और प्रकृति प्रेमी – ने अपनी जान जोखिम में डालकर इन नरभक्षियों का शिकार किया। इस पुस्तक में कॉर्बेट ने अपने अनुभवों को रोचक और सजीव भाषा में प्रस्तुत किया है। हर घटना का विवरण इतना वास्तविक है कि पाठक खुद को जंगल के बीच रोमांच और भय के उस वातावरण में महसूस करने लगते हैं। लेकिन यह सिर्फ एक शिकारी की कहानी नहीं है – यह जंगल वन्यजीव संरक्षण और मानवीय संवेदनाओं की एक गहरी झलक भी प्रदान करती है।