कुटज.... जीवन की हर विभीषिका को पार करता हर संघर्ष से विजित होता हर विपरीत परिस्थितियों को मात देता जैसे खिल आता है सुदूर वन में कुटज का सुंदर सुकोमल पुष्प वैसे ही इस काव्य संग्रह कुटज” की कविताएँ हैं। जीवन के हर आयाम को छूती कठिन परिस्थितियों पर विजय प्राप्त कर जीवन को सुकून देतीं विषमताओं को पार करने का हौसला देतीं घायल मन पर मरहम लगातीं सी हैं । डॉ रेणु मिश्रा