Kya Aur Kyon Ke Beech
Hindi


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About The Book

युवा गुलशन कुमार ‘सुदीप’ ने चौदह साल की छोटी उम्र से कविताएं और गीत लिखना शुरू कर दिया था। ऐसा कहा जाता है कि सन १९५९ में प्रतिष्ठित भारतीय राष्ट्रीय कवियों के सम्मेलन में भाग लेते हुए - देश के प्रसिद्ध और प्रिय कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी ने युवक गुलशन कुमार के गीत और कविताओं को सुनकर उन्हें ''सुदीप'' उपनाम से सम्मानित किया। इसी के बाद उन्होंने अपना कलम नाम ‘सुदीप’ अपना लिया। सत्रह साल की उम्र में छात्र ‘सुदीप’ को गाजियाबाद शहर के महानन्द मिशन इंटर कॉलेज ‘लीग’ के साथियों ने एक आगामी उभरते कवि के रूप में स्वीकार कर लिया था। १९६० से २०२० के वर्षों में संवेदनशील कवि और लेखक सुदीप जी की १२० से अधिक कविताएं और लगभग ४० गीत भारत की अनगिनत पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए इनमें शामिल हैं - ट्रिब्यून जनसत्ता सबरंग नवभारत टाइम्स संडे मेल नूतन सवेरा सारिका धर्मयुग दैनिक भास्कर और संबोधन। ‘क्या और क्यों के बीच’ कविता संग्रह में १९५६ से २०१९ वर्षों के दौरान सुदीप जी द्वारा लिखित अनोखी और विशेष कविताएँ प्रस्तुत हैं। सन २०१९ तक इन कविताओं को सुदीप जी ने विकसित और ताज़ा रखना जारी रखा था। यह संग्रह उनके सबसे अद्यतन लिखित संस्करणों को प्रस्तुत करता है। हमें उम्मीद है कि विश्व के पाठक इन कविताओं का आनंद लेंगे। - कार्तिक बिंदिया और श्रीमती विजया सुदीप
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