पानी की समस्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। इसके लिये जहाँ तक देखा जाये तो मानव ही जिम्मेदार है। प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करना और लगातार हरियाली को नष्ट करना इसका प्रमुख कारण है।जल संकट की स्थिति का निर्धारण प्रति-व्यक्ति प्रतिवर्ष होने वाली जलापूर्ति के आधार पर किया जाता है। यदि किसी प्रदेश में स्थानीय जलापूर्ति प्रतिव्यक्ति प्रतिवर्ष 1000 घनमीटर से कम है तो ऐसे क्षेत्र जल संकट से ग्रस्त माने जाते हैं। वर्तमान मे इस वर्ग में लगभग 25 से अधिक देश आते हैं जहाँ विश्व की 24 करोड़ से अधिक जनसंख्या रहती है। जल संकट से ग्रस्त सर्वाधिक 11 देश अफ्रीका में तथा 9 निकट पूर्व के देशों में है। भारत के दो तिहाई भाग जल संकट से ग्रस्त है।