धर्म के मामले में इंसान सोया हुआ है और कर्मकांडों में उलझकर उसकी नींद और भी गहरी हो गई है। नींद से कैसे जागा जा सकता है? इसी समस्या का समाधान ओशो ने इस पुस्तक में किया है। इन पुस्तक के माध्यम से ओशो ने पहले विचार और फिर निर्विचार होने की सीख दी है ताकि मन पर निर्मित नींद की सारी परतें एक-एक करके हटाई जा सकें|