मौजूदा पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में व्याप्त अंतर्विरोधों को समझने और एक बेहतर समाज बनाने के लिए चल रहे संघर्ष जो विभिन्न हिस्सों में जारी है उसे एक बड़े विस्तृत आयाम देने। जाति और धर्म आधारित राजनीति के जगह मुद्दों पर आधारित राजनीति राजनीति के केंद्र बिंदु के रूप में प्रतिष्ठित हो इस उम्मीद के साथ समाज के व्यापक हिस्सों को क्रांतिकारी चेतना से लैस होकर जुझारू आंदोलन के लिए तैयार होना होगा। इस उम्मीद को जगाने और उनके अंदर आत्मविश्वास पैदा करने में यह पुस्तक मददगार साबित होगी। हम लड़ेंगे और जीतेंगे इंकलाब जिंदाबाद।