इस उपन्यास में एक स्त्री और एक साधु के बीच की कहानी में स्त्री के लाल आँचल के टुकड़े का दान ले कर ही उस साधु का सन्यास पूर्ण होता है। कहानी पूरी तरह से आध्यात्मिक है और सांसारिकता से वैराग्य के ओर गमन की कहानी है। एक और चरित्र इस कहानी को रोचक बनाता है वो है किशोर वय का एक बाल साधु इनके चित्रण में ही उपन्यास की पूरी कहानी है।