भगवान राम के अनन्य भक्त और महान वज्ञानिक तपस्वी वेद ज्ञाता नीति निपुण बलशाली पवन पुत्र हनुमान जी जिन्हे अनेकों नाम से जाना जाता है। माता अंजना और पवन जी के पुत्र भला बंदर कैसे हो सकते हैं। यह हमारी भूल है की हमने धर्म शास्त्र को सही से समझा नहीं हमने वही पढ़ा जो हमारे सामने परोस दिया गया। महावीर हनुमान जी अपने प्रभु श्री राम जी के आज्ञा से माता सीता की खोज में लंका गए और जब उनका सामना रावण से हुआ तो भय रहित रावण को हर प्रकार से समझाने का प्रयास करते हैं लेकिन जब नाश मानुष पर छाता है तो पहले विवेक मर जाता है। अंत में रावण को भयभीत करते हुए रावण के सामने लंका को जला दिया ।