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Description
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*लेखनी*ल.... लेखनलिकत ( सं ुदर)*लेखन लिक्षत लिकत लय शब्द सकल सम्मान**काव्य सुधा मकरंद मिस भाव िविदत सं ज्ञान*।ख.... खं क (मीठी ध्विन)*खं क समिस मस्तक मलय अिवरल काव्य िवचार**पूज्यवंदृ करतिूलकापृिष्ठतपुिष्पतहार*।नी....िनिवता (रचनात्मक कल्पनाशील) नमस्कृ ता (आदर करने वाली मीठी वाणी) िनश्का ( शुद्ध) िनरालया ( क्रम में सवोर्त्तम) नानकी ( मानवता की स्वािमनी ईश्वर की कृ पा) िनिर्दष्ट ( िनदेर्श िकया गया) िनवित ( सं ुदर) *िनिवता िनवा नमस्कृ ता नाना भािं त िविशष्ट**िनरालया िनश्का िनवित नमन समिस िनिर्दष्ट*।*मंजषू ा*...मन् ....से मंजलु मनोरम मनहर िजसकी मृदंग यािन यंू कहें तो एक झलक की खनक सुनकर ही आप सब का मन आह्लािदत हो उठेगा। ज....ज्यािमतीय ज्योत्सना..लेखनी पिरवार की िवशुद्ध ज्यािमतीय शब्दों के काल्पिनक आरेख की ज्योत्सना में पूरा हमारा लेखनी पिरवार िनत्य प्रकाशमान हो उठता है तो आइए िकं िचत शब्दों के दैिदप्य की आभा आसा का शब्द सागर िपपासा की व्यंजना शािब्दक प्रमे की पराकाष्ठा का प्रकाश जो िक परम् आदरणीय गुरुदेव आदरणीय संजीव सर जी और परम् आदरणीया िप्रय दीिप्त दीदी के आशीष से लिक्षत आलोिकत ज्योित िकस प्रकार हमारे लेखनी पिरवार में अनेक रंगों के िमश्रण इंद्रधनुषी सतरंगों सेप्रकाशमान है उसकी प्रज्विलत लौ का क्षिणक प्रकाश देखते ह।ैं षा...6षाड्गुन्य ( छह गुण) यािन... संिध िवग्रह यान आसन द्वैधीभाव और संश्रय जसै ेगुणोंकीिनपुणताकीिविशष्टताकाभीअनुपमखट्टामीठासंग्रहभीहमारे लेखनी पिरवार में सिम्मिलत ह।ैषडंग(छहअगं )....रूपभेदा प्रमाणािन भाव लावण्योजनम्स ा दृ श्य ं व िर् ण क ा भ ं ग इ ि त ि च त्र ं ष ड ं ग क म ।् यािनरूपभेदप्रमाणभावलावण्यसादृश्यऔरविर्णकाभंगयेछःअगं जोिक सौदं यर् िचत्रकला को दशातर् े ह।ैं और लेखन में यिद हम यह गुण लेखक का अपनी लेखनी के प्रित काल्पिनक भावात्मक सौदं यर्ता का अपनी अतं मर्न तिू लका से श्रंगृ ार करने की भावना में सिम्मिलत करें तो यह यथोिचत सवर्दा उिचत है और इनमें से कोई भी ऐसी नीित गुण अगं नही ं िजसकी िवशेषता लेखनी पिरवार सेअिभन्न हो।तो आइए सुनते व समक्ष देखते हैं लेखनी पिरवार के िप्रय सदस्यों से साम दाम दण्डभेदजसै ेखट्टेमीठेसवर्गुणसंपन्निविशष्टकाल्पिनकशािब्दकपरीक्षणऔर काव्यप्रमे िनरीक्षण..नयदु ीलेखनीमंजषू ाकीअलौिकककृितया.ं..