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About The Book
Description
Author
मित्रे! मैं कथा लघुकथा में रमा रहा पचास साल से। बीच बीच में कभी कोई कोई बात कविता में भी कही पर इतनी ही कि अब तक इस सफर में सिर्फ छप्पन छोटी बड़ी कवितायें ही लिख पाया और कभी काव्य संग्रह निकालूंगा ऐसा ख्याल भी न आया। इस बीच प्रसिद्ध लेखक व ‘साहित्य अमृत’ के संपादक लक्ष्मी शंकर वाजपेयी से निकटता बढ़ी। वे देवशील मंच पर कविताओं का पाठ करते थे और मेरी कुछ कविताओं का पाठ भी प्रस्तुत किया! फिर वे मेरे पीछे पड़ गये कि कविता संग्रह क्यों नहीं प्रकाशित करवाते? मैंने बताया कि मैं खुद को कथा में ही सुऽद महसूस करता हूँ और कवितायें भी बहुत कम हैं मेरी। उन्होंने कहा कि विदेशों में तो चालीस कविताओं के संकलन भी देखे हैं आपकी तो इससे ज्यादा ही होंगीं। इससे पहले एक बार प्रसिद्ध लेखिका मणिका मोहिनी ने भी अपनी पत्रिका ‘वैचारिकी’ में एक साथ मेरी अनेक कवितायें प्रकाशित की थीं तब कहीं मन में आया था कि सच ये कवितायें मेरी ही हैं? इसी तरह कभी बड़े भाई जैसे फूलचंद मानव भी ‘जागृति’ में मेरी कविताओं को स्थान देते रहे यों तो विष्णु नागर जी ने भी ‘शुक्रवार’ में कवितायें छाप दीं पर काव्य संग्रह का मुहूर्त्त अब जाकर निकला! वैसे प्रेम जनमेजय की ‘व्यंग्य यात्र’ में भी कवितायें आती जा रही हैं। प्रसिद्ध एक्टर राजेंद्र गुप्ता ने मेरी कविताओं का पाठ किया।