Lokpriya Shayar Aur Unki Shayari - Nasir Kazmi
Hindi


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About The Book

इस अत्यंत लोकप्रिय पुस्तक–माला की शुरुआत 1960 के दशक में हुई जब पहली बार नागरी लिपि में उर्दू की चुनी हुई शायरी के संकलन प्रकाशित कर राजपाल एण्ड सन्ज़ ने हिन्दी पाठकों को उर्दू शायरी का लुत्फ़ उठाने का अवसर प्रदान किया। श्रृंखला की हर पुस्तक में शायर के संपूर्ण लेखन में से बेहतरीन शायरी का चयन है और पाठकों की सुविधा के लिए कठिन शब्दों के अर्थ भी दिये हैं और साथ ही हर शायर के जीवन और लेखन पर रोचक भूमिका भी है ।आज तक इस पुस्तक–माला के अनगिनत संस्करण छप चुके हैं। अब इसे एक नई साज–सज्जा में प्रस्तुत किया जा रहा है।सईद नासिर काज़मी (8 दिसम्बर 1925 – 2 मार्च 1972) का जन्म पंजाब में स्थित जालंधर शहर में हुआ था। उनके घर में कविता शायरी और संगीत का माहौल था और इससे प्रभावित होकर नासिर किशोरावस्था में ही शे’र कहने लग गये थे। उन्हें प्रकृति से भी बहुत लगाव था जिसकी झलक उनकी शायरी में मिलती है। नासिर काज़मी की शायरी उनकी छोटी बहर और चाँद रात बारिश याद तन्हाई जैसे रोज़मर्रा के सहज शब्दों के इस्तेमाल के लिए जानी जाती है। जब वे नौकरी के सिलसिले में अम्बाला से लाहौर गये तो वहाँ के बेहद परिष्कृत अदबी माहौल में उनकी शायरी में सृजनात्मक विकास हुआ। 1947 में भारत–विभाजन के बाद नासिर पाकिस्तान में बसे गये लेकिन बँटवारे ने उनके अंदर एक गहरी उदासी पैदा की जो उनके साथ आखिरी दम तक रही ।
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