प्रस्तुत पुस्तक ''मां तो मां होती है'' अपने पूज्य पिताजी व माताजी के शुभ आशीर्वाद से परिवार की प्रेरणा से एवं आप सभी के सहयोग से इस काव्य पुस्तक को लिखने के योग्य हुआ हूं। पुस्तक समाज को एक नई दिशा प्रदान करेगी और गिरते हुए सामाजिक मूल्यों को बचाने का भरसक प्रयास करेंगी।माता- बहनों के प्रति समाज में जो सम्मान की भावना लुप्त होती जा रही है। उसको बचाने में अपनी अहम भूमिका निभाएगी। ''मां तो मां होती है''कविता के माध्यम से मां के महत्त्व को सभी के सामने लाएगी। मां जन्म से पहले क्या-क्या सहन करती है? वह क्या-क्या दुख उठाती है ? मरते दम तक उसकी क्या-क्या कामनाएं होती हैं? वह अपना सारा जीवन कैसे अपनी संतान के लिए समर्पित कर देती है। जिसका कर्ज संतान अगले जन्म तक भी नहीं चुका सकतीफिर भी संतान उसकी कुर्बानी को समझ क्यों नहीं पाती हैं । ''करत- करत अभ्यास जड़मति सुजान'' के माध्यम से शिक्षा प्राप्ति के लिए अभ्यास पर जोर दिया गया है एवं गलतियों के सुधार पर बल दिया गया है।''परिवेश'' कविता में परिवेश के महत्व पर एवम् अच्छे परिवेश के अनुकरण पर बल दिया है इन्हीं शुभकामनाओं के साथ - आपका अपना श्याम सुंदर दास