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About The Book
Description
Author
कभी-कभी लगता है हम सब एक ही कहानी जी रहे हैं— बस किरदारों और जगहों के नाम अलग हैं। मैंने यह किताब काग़ज़ पर नहीं अपनी रूह पर लिखी है। हर शब्द उस आँसू से निकला है जो किसी ने देखा नहीं हर पंक्ति उस ख़ामोशी से जन्मी है जिसे मैं सालों तक ढोती रही। तुम पढ़ोगे तो पाओगे कि ये किस्से मेरे नहीं तुम्हारे भी हैं। तुम्हारे टूटे हुए हिस्से तुम्हारे अनकहे सवाल और वो आवाज़… जो हमेशा भीतर से पुकारती है: “मैं अब भी तुम्हारे अंदर ज़िंदा हूँ।” यह किताब मंज़िल नहीं है एक सफ़र है— जहाँ तुम और मैं साथ चलेंगे। और अगर किसी पन्ने पर तुम्हें लगे कि यह पंक्ति तुम्हारी है… तो समझना हम दोनों का अकेलापन थोड़ा कम हो गया। स्नेह और विश्वास के साथ