भारतवर्ष प्राचीन काल से ही विदेशियों के आकर्षण का केंद्र रहा है और अनेक विदेशी यात्राी अपनी आकांक्षाओं की पूर्ति हेतु यहाँ राजनीतिक प्रतिनिधि और व्यापारिक प्रतिनिधि के रूप में आते रहे हैं। इन यात्रियों ने अपने यात्रा वृत्तांतों एवं व्यापारिक प्रतिवेदनों में भारतवर्ष की सामाजिक आर्थिक धर्मिक एवं राजनीतिक स्थिति का विवरण छोड़ा है जो निःसन्देह एक इतिहासकार के लिए तत्कालीन इतिहास को जानने का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है। मुगल काल में इस दृष्टि से पफादर मोन्सेरेट विलियम हॉकिन्स विलियम पिफंच सर टॉमस रो एडवर्ड टैरी पेलसर्ट टैवर्नियर बर्नियर इत्यादि का योगदान अध्ययेताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। सम्राट अकबर का शासन काल संस्धत व हिंदी-पद्य शैली का स्वर्णिम युग था। अकबर प्रथम मुगल शासक था जिसने संस्धत को प्रश्रय दिया। अकबर के शासनकाल में ही ‘पफारसी प्रकाश’ नामक प्रथम पफारसी संस्धत कोश संकलित हुआ। पुस्तक की विषय वस्तु निम्नलिखित है- मुगलकालीन इतिहास के स्त्रोत : मुगलकालीन यूरोपीय यात्रियों के वृत्तान्त : अबुल फज़ल-विचारक एवं इतिहासकार : सोलहवीं शताब्दी की पूर्व संध्या पर भारत : सामाजिक एवं सांस्धतिक स्थिति : बाबर : हुमायूँ : शेरशाह सूरी एवं उसके उत्तराध्किारी : इस्लामशाह : अकबर महान् : फतेहपुर सीकरी : जहाँगीर : शाहजहाँ : औरंगजेब