हमारे परिवेश में प्रतिक्षण असंख्य घटनाएं घटित होती हैं जो जड़-चेतन दोनों को प्रभावित करती हैं। हृदय जब मानव-मन को बार-बार उद्वेलित कर इनमें से किसी घटना को शब्द-रूप देने के लिए बाध्य कर देता है तो पुस्तक की रचना होती है। ‘माड़ौ होइ गे’ एक छोटे से कस्बे में घटित ऐसी ही घटनाओं का एक दस्तावेज है जिसे हृदय के संरक्षण में मेरे मन ने लिपिबद्ध दिया है। आशा है आप सुधी पाठकों और विद्वजनों का आशीर्वाद मेरे इस प्रथम उपन्यास को अवश्य मिलेगा। -नंदन पंडित