महाभारत' केवल भारतीय साहित्य का ही नहीं अपितु विश्व साहित्य का एक अनुपम 'ग्रन्थ' है। ज्ञान का कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है जो इसमें समाविष्ट न हो।यह ज्ञान का विश्वकोष है। इसका विचार फलक काफी व्यापक है। यह संसार का सबसे बड़ा ग्रन्थ है। इलियड और ओडीसी से दस गुना बड़ा। भले-बुरे व्यक्तियों के चिन्तन सोच-विचार व्यवहार-कर्म आदि का जितना अधिक मनोवैज्ञानिक मनोआध्यात्मिक विश्लेषण रचनाकार श्रीकृष्ण द्वैपायन वेदव्यास जी ने इस महाकाव्य में किया है उतना अन्यत्र कहीं नहीं है। महाभारत के संक्षेपकों व्याख्याकारों एवं टीकाकारों ने इस ग्रन्थ को केवल युद्ध कथा में सीमित कर दिया है जबकि ऐसा है नहीं। कथा के केन्द्र में युद्ध होते हुए भी इसके माध्यम से रचनाकर जीवन के प्रयोजनों आदर्शो लक्ष्यों एवं शांति सद्भाव के विविध सूत्र प्रस्तुत करते हैं। इस प्रकार यह एक जीवन ग्रन्थ हैं।