महादेवी वर्मा की गणना छायावाद की बृहच्चतुष्टयी में की जाती है किंतु उनका व्यक्तित्व एवं कृतित्व अन्य छायावादी कवियों से नितांत भिन्न है। बिम्ब छायावादी काव्य का अपरिहार्य अंग है और महादेवी तो बिम्बधर्मी कविता की विधायिका ही हैं। महादेवी के काव्य को समझने के लिए उनके बिम्बों को ग्रहण करना नितांत आवश्यक है जिसमें यह किताब पाठकों की सहायता करेगी।