‘महादेवी वर्मा की साहित्य-साधना’ पर विचार करने की आवश्यकता हर समय महसूस होती रही है। हम यह भी चाहते हैं कि श्रेष्ठ कृतियों की पहचान होती रहे। फिर अपनी परंपरा को सर्वोत्तम जानने की उत्सुकता बनी रहनी चाहिए। यह संगोष्ठियाँ सार्थक और रचनाशील समीक्षा का कार्य मुखर और अमुखकर ढंग से करती रहती हैं। यह संगोष्ठियाँ इसलिए भी जरूरी हैं कि संगोष्ठियों के नाम पर खराब घास-कूड़ा इधर -उधर की अनचाही खरपतवार हों लेकिन उसकी छँटाई-निराई होती रहती है। इस पुस्तक में कई महत्वपूर्ण शोध-लेख हैं। यह लेख आज के नए समीक्षकों को प्रेरित करेंगे। हम चाहेंगे कि ये लेख महादेवी वर्मा के साहित्य के नए प्रतिमानों पर व्यापक तथा खुले संवाद का स्वस्थ वातावरण बने। यह पुस्तक हमारे लिए मूल्यवान नहीं बल्कि आज की जरूरत है। एक संग्रहणीय कृति।