यह पौराणिक लघु उपन्यास पुरी के पवित्र शहर में भगवान जगन्नाथ के प्राचीन मंदिर से जुड़ा हुआ है। कहानी पुरी में जगन्नाथ कहलाए जाने वाले विष्णु की पत्नी देवी लक्ष्मी के जीवन में आनेवाली कठिनाइयों और परीक्षणों के इर्द-गिर्द घूमती है। यह लक्ष्मी पुराण से प्रेरित है जो पंद्रहवीं शताब्दी में बलराम दास द्वारा उड़िया भाषा में लिखित एक काव्य ग्रंथ है। निहार शतपथी मुख्य रूप से सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर समाचार पत्र-पत्रिकाओं के लिए लेख और कहानियाँ लिखते हैं। उनकी पहली पुस्तक उनकी मातृभाषा उड़िया में वर्ष 2005 में प्रकाशित हुई थी जो लघु कथाओं का एक संग्रह है। अंग्रेज़ी में उनकी नवीनतम प्रकाशित पुस्तक है‘ द पजल्स ऑफ़ लाइफ’ जिसका जीवन की उलझनें एवं श्रीमद् भगवद् गीता द्वारा उनके समाधान'' नाम से हिंदी में अनुवाद हुआ है।