मैं तीन वादे करना चाहता हूं। पहला यह कि व्यक्तिगत रूप में देश की जनता जो मुझे दायित्व देगी मैं उसे पूरा करने में कभी भी कोई कमी नहीं रखूंगा। दूसरा मैं अपने लिए कभी कुछ नहीं करूंगा और तीसरी बात मैं बद-इरादे से कभी भी कोई काम नहीं करूंगा। यह विश्वास दिलाता हूं।<br>श्री नरेन्द्र मोदी<br>भारत का प्रधनमंत्राी बनने के बाद नरेन्द्र दामोदर दास मोदी की लोकप्रियता तीन सौ गुना बढ़ गई। देश और दुनियाभर में उनके नाम का डंका बज रहा है। दुनिया के उन मुल्कों में भी नरेन्द्र मोदी को एक नई पहचान मिली है जिनकी दिलचस्पी भारत में है। सभी की नजरें उनपर टिकी हुईं हैं कि वह आगे कौन सा कदम उठाते हैं। पाकिस्तान के अलावा अमेरिका ब्रिटेन और चीन जैसी महाशक्तियां अपने संबंधें को बेहतर बनाने के लिए बहुत उत्सुक हैं। हर किसी को उम्मीद है कि भारत में विकास का नया सूरज उगेगा।<br>बचपन से चुनौतियों को स्वीकार करने वाले मोदी के लिए यह एक कठिन परीक्षा भी है कि वह देश की चुनौतियों को कैसे स्वीकार करेंगे। कैसे देश के करोड़ों लोगों की उम्मीदों को एक नई दिशा देंगे जो उन्होंने चुनाव से पहले आम जनता से वादे किए थे। कई सारे सवाल हैं तो कई सवालों के उत्तर भी हैं क्योंकि पहली बार 2001 में जब उन्होंने गुजरात की सत्ता संभाली थी तो उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब पूरे देश की कमान उनके हाथ में है। वह ऐसा कर पाए तो केवल इसलिए कि वह एक महान नेता हैं। सचमुच में महानायक ।<br>अनुभवी पत्राकार कुमार पंकज ने नरेंद्र मोदी के बचपन से लेकर महानायक बनने तक के पायदानों का बखूबी अध्ययन किया है। ‘नरेन्द्र मोदी का नमो मंत्रा’ नामक पुस्तक के सपफल लेखक की एक और संग्रहणीय कृति।