मेरी यह पुस्तक मैं हूं पाठक वस्तुतः प्रेरणादायी कविताओं का संग्रह है ।साथ ही साथ इसमें कुछ चुनिंदा प्रातः स्मरण भी हैं। कुछ समाज कल्याण के विषय हैं। मेरा प्रयास यह है कि मैं अपने आप को एक अन्योक्ति मानकर जीवन के जो आदर्श हैं जीवन की जो व्यवहारिकता है सभी रूप को अपनी कविता के माध्यम से अपने पाठकों तक पहुंचाऊं ।मैंने जिंदगी के संघर्षों जिंदगी के गम जिंदगी की खुशियों और जिंदगी के विभिन्न आयामों को अपनी कविता के माध्यम से छूने की कोशिश की है। इस समाज को प्रत्येक व्यक्ति को प्रेरित करने की कोशिश की है। जिंदगी में रुकना कभी नहीं है। कितनी बाधाएं हो कितनी प्रतिकूल परिस्थितियां हों ।लेकिन जज्बा कभी नहीं छोड़ना चाहिए ।और इन सभी संकल्पना को समाहित करते हुए मेरी पुस्तक मैं हूं पाठक काव्य संग्रह आप सभी को समर्पित है।