रोज रोज कुछ छूट रहा है भाग भाग हम पकर रहे।लिए साथ जो जाना हमको हम उससे ही मुकर रहे।।लेखक अमित श्रीवास्तव जब उपरोक्त चंद पंक्तियाँ लेकर सोशल मीडिया पर आए तब लोगों व्दारा की गई सराहना से प्रभावित होकर कवि हृदय अपने लेखों को जो की बहुत ही सरल शब्दों में गुथी गई हैं सोशल मीडिया पर लिखना जारी रखा जो लोगों को सहज ही प्रभावित करने लगीं और लोगों ने असीमित स्नेह और आशीर्वाद दिया जो क्रमशः बढ़ता ही जा रहा है। अमित श्रीवास्तव की कविताएँ गीत और गजल सभी पाठकों को निश्चित ही भाव विभोर करेंगी।