घाटियों जंगलों और स्वर्ण उगलने वाली नदी की गोद में बसे झारखण्ड (तत्कालीन बिहार) के एक बहुत ही छोटे से शहर में मेरा जन्म एक मध्यम वर्गीय संयुक्त परिवार में हुआ। मैंने बचपन में शरारतों खेलकूद और मस्ती में कहीं ज्यादा विश्वास किया। मेरी पढ़ाई विभिन्न सरकारी स्कूलों व कॉलेज में हुई जहाँ मैं अन्धों में काना राजा रहा। अभियांत्रिकी का प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद मैं देश-विदेश के भिन्न-भिन्न निजी एवं बहुराष्ट्रीय संस्थानों में भटकता रहा। आज मैं अपने देश की मिट्टी में स्थित एक प्रगतिशील स्वचालित वाहन के विनिर्माण औद्योगिक संस्थान में महाप्रबंधक के रूप में कार्यरत हूँ।कभी हवाओं में तैरता हूँकभी लहरों में मौज करता हूँ।आज़ादी मेरी फितरत हैइसलिए दुनिया पर राज करता हूँ।मैं मन का राजा हूँकेवल अपने दिल की सुनता हूँ।अपने इरादों का पक्काअपनी जिद पे ही रहता हूँ।कैसे समझाऊँ?समंदर का लहर हूँमैं हवा का झोंका हूँइसीलिए आज मैं ‘आवारा’ हूँ।