ये किताब मेरे जीवन की एक ऐसी घटना के बारे में है। जिसके घटने की संभावना बिल्कुल टूटते हुए तारे के समान थी। ऐसा जीवन में दोबारा शायद कभी नहीं होगा। मैं भीतर से बिल्कुल खाली था। तभी मैं उससे मिला और मुझे मेरे जीवन का उद्देश्य भी मिल गया। समय की जो समझ मुझे आनी चाहिए थी। वो उससे मिलने के बाद मुझमें आ गई। इस कहानी में दो मुख्य किरदार हैं। मैं और मीनाक्षी। क्योंकि ये कहानी आपको मैं बता रहा हूँ। इसलिए आपको मेरे तरफ का हिस्सा ज़्यादा दिखाई देगा। इसका ये बिल्कुल भी अर्थ नहीं है कि जो मैं बताऊँगा वही सच हो। पर मैं कभी झूठ नहीं बोलता। ये सच है। इसमें कहानी के साथ-साथ मेरे भीतर चल रहे संवाद भी मैं बताता हूँ। मैं का होना। ये मेरे लिए कितना सकारात्मक हुआ या नहीं हुआ? मैं का आभास मुझे कैसे हुआ? और मैं के बिना क्या मैं कुछ हूँ या नहीं? ये सब कुछ इस कहानी में है। पर ये कहानी नहीं है। रीयलिज़म है।
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