Main Boond Swayam Khud Sagar Hoon


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About The Book

‘मैं बूंद स्वयं खुद सागर हूँ’ कवि आशुतोष अग्निहोत्री का चौथा कविता-संग्रह है। इस कविता-पुस्तक में उन्होंने अपनी जिन कविताओं को प्रस्तुत किया है वे एक सजग संवेदनशील और संवादधर्मी सामाजिक मनुष्य के सम्पूर्ण संसार को प्रतिबिम्बित करती है। प्रकृति ईश्वर समाज परिवार और देश ने कवि को जो दिया यह संकलन उसका कृतज्ञता ज्ञापन है कोई भी पाठक जिसे पढ़ते हुए अपने ही भावोद्गार समझेगा। ‘स्नेह’ ‘प्रेम’ ‘धर्म’ ‘देश’ ‘दर्शन’ और ‘प्रेरणा’-इन छह उपशीर्षकों के तहत कवि ने यहाँ उन तमाम स्रोतों को अपने भाव समर्पित किए हैं जो मनुष्य मात्र के जीवन का आधार हैं जहाँ से वह जीने की सिरजने की आगे बढ़ने और स्वयं को सार्थक करने की प्रेरणा ग्रहण करता है। ये कविताएँ हमें हमारी उन अनुभूतियों को व्यक्त करने का बहाना बनती हैं जिन्हें हम अपने भीतर तो रखते हैं लेकिन उचित शब्दावली और सम्यक लय के साथ व्यक्त नहीं कर पाते। इसीलिए ये कविताएँ सबकी हैं-उनकी भी जो काव्य-आस्वाद के अनुभवी लोग हैं और उनकी भी जो पहली बार इन्हें पढ़ेंगे और सदैव के लिए अपने अन्तस में सँजो लेंगे। एक भाव सम्पन्न कविता-संग्रह जिसकी कविताओं का पाठ आप अपनों के बीच बैठकर बार-बार करना चाहेंगे।
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