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About The Book
Description
Author
<p>“मैं लक्ष्मी हूँ - करोड़ों की देवी” केवल एक पुस्तक नहीं बल्कि एक आह्वान है-हर इंसान के भीतर सोई हुई लक्ष्मी चेतना को जगाने का।</p><p>इस ग्रंथ में अंजना रितौरिया अपने व्यक्तिगत अनुभवों साधनाओं और दिव्य प्रेरणाओं को साझा करती हैं। वे दिखाती हैं कि लक्ष्मी केवल मंदिरों की मूर्तियों में नहीं बल्कि हमारे कर्म विचार और संकल्पों में भी निवास करती हैं। जब हम अपने भीतर सत्य श्रम और सेवा को स्थान देते हैं तभी लक्ष्मी का वास्तविक आवाहन होता है।</p><p>पुस्तक में लक्ष्मी के शास्त्रीय स्वरूप के साथ-साथ उनके आधुनिक जीवन में प्रकट होने के चमत्कारिक संकेतों का भी वर्णन है। यह पाठक को आत्म-साक्षात्कार की यात्रा पर ले जाती है जहाँ वह समझ पाता है कि धन केवल भौतिक साधन नहीं बल्कि एक ऊर्जा है।<br>यह ऊर्जा तब फलती-फूलती है जब व्यक्ति अपने भीतर की कमी भय और संदेह को त्यागकर समर्पण कृतज्ञता और साहस को अपनाता है।</p><p>“मैं लक्ष्मी हूँ” पढ़ते हुए पाठक केवल देवी की महिमा नहीं समझता बल्कि स्वयं में देवीत्व का अनुभव करता है। यह पुस्तक हर स्त्री को अपने सामर्थ्य की पहचान कराती है और हर पुरुष को लक्ष्मी ऊर्जा का साधक बनने का मार्ग दिखाती है।</p><p>यह ग्रंथ आपके जीवन में धन समृद्धि और शांति का द्वार खोलने की कुंजी है।</p>