कवि शब्दों का संयोजक होता है जिस प्रकार एक शिल्पकार अपनी कला द्वारा निर्माण में उपयोग की जानेवाली सामग्री का उपयोग अपनी समझबूझ से बेहतर से बेहतरीन ढंग से करके एक अच्छी आकृति को रूप देता है एक तरह से उसे सजाता सँवारता है उसी प्रकार एक कवि शब्दों का संयोजन इस प्रकार करता है कि रचना पढ़ने पर एक आकृति या छवि आँखों के सामने साकार हो उठती है। इसलिए कवि को शब्दशिल्पी कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा।।