‘मैं तुम्हे जानता हूँ’ यह एक कविता संग्रह है। जिसमें 100 कविताएँ सम्मिलित हैं। इसके लेखक अमित प्रेम ‘ए के आर’ जी का कहना है कि वे इस किताब के अनुसार आप सभी को बहुत अच्छे से जानते हैं। यह किताब उनके और आप जैसे लोगो से जुड़कर बनी है। इसमें लिखी 100 कवितओं में से किसी न किसी कविता में आप खुद को जरुर पहचानेंगे। या एक से ज्यादा कविताएँ आपको लगेंगी कि ये तो आपके जीवन में हुआ है यह तो आपके लिए है जिसे अमित जी ने लिखा है। तब आपको लगेगा कि अमित जी आपको कैसे जानते हैं उन्होंने आपके जीवन की ये बात कैसे लिख दी। इस किताब को पढ़कर आप अमित जी को भी जान पाएंगे और तब आप भी कहेंगे कि ‘मैं तुम्हें जानता हूँ’। इसीलिए इसे जरूर पढ़े और औरों को भी पढ़ाये।. About the Author. अमित प्रेम ए के आर जी का पूरा नाम अमित कुमार यादव है। इनका जन्म 30 मई 1999 को छत्तीसगढ़ राज्य के सरगुजा जिले के माँ महामाया नगरी अम्बिकापुर शहर के एक छोटे से गांव नावगढ़ में हुआ। ये बहुत ही हसमुख और सरल स्वभाव के व्यक्ति हैं। इन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा गांव के एक छोटे से स्कूल आ. जा. का. वि. प्राथमिक शाला नवागढ़ में ली और उच्च शिक्षा शहर के सबसे बड़े शासकीय स्कूल शा. बहु. उ. मा. विद्यालय (मल्टीपर्पज) अम्बिकापुर में पूर्ण किया। इन्होंने विज्ञान संकाय में श्री साई बाबा आदर्श महाविद्यालय अम्बिकापुर से स्नातक डिग्री हासिल की है। आज ये एक NGO में पार्ट टाइम जॉब और अपने जीवन में ऑवर टाइम लेखन का कार्य करते हैं।ये सह-लेखक के तौर पर 12 से अधिक पुस्तकों का हिस्सा रह चुके हैं और इनकी दो पुस्तकें Amit Hidden Words और AK अनकहे अल्फाज़ प्रकाशित हो चुकी है। इन्हें हिंदी छत्तीसगढ़ी व अंग्रेजी भाषाओं में कविताएं शायरियां और कहानियां लिखना बेहद पसंद है। इनकी रचनाओं से पता चलता है कि इनकी अत्याधिक रुचि प्रेम पर है।