मकानों के जंगल में तितली पुस्तक बच्चों जवानए बूढ़ों को ध्यान में रखकर लिखी गई है। इस पुस्तक के तीन भाग. क्रमशः खण्ड एक बचपनए खण्ड दो यौवनए खण्ड तीन बुढ़ापा हैं। खण्ड एक में बच्चों के विकास हेतु कविताएं हैं। खण्ड दो में युवक.युवतियों के सर्वांगीण विकास के लिए कविताएं हैं। खण्ड तीन बुढ़ापा में बुजुर्गों के सोच.विचार को प्रशस्त करने के लिए कविताएं हैं। पुस्तक में सारे समाज में जंगल राज को दूर करके मानवीय संदर्भोंए मानवीय प्रसंगोंए मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ व प्रशस्त करने का प्रयास हैए जिससे मानव वास्तव में रूढ़िवादी व संकीर्ण विचारों को छोड़कर वास्तविक रूप से मानव बन सके। कविताएं हर प्रकार के मानव को ध्यान में रख लिखी गई हैं। प्रस्तुत पुस्तक में कविताएंए गीतए ग़ज़ल बहुत ही रोचक हैं। पाठकों को पढ़ने में निश्चित ही आनंद आयेगा। साथ ही सर्वांगीण विकास भी प्रत्येक मानव का होगा। चाहे सामान्य मानव हो या अपराधग्रस्त मानव होए यह पुस्तक हर प्रकार के मानव का पथ. सुधार करेगी। पाठक का एक बार नहीं बार.बार पुस्तक को पढ़ने का मन करेगा। पाठकों से अनुरोध है कि पुस्तक को बीच.बीच में से न पढ़ेंए बल्कि पुस्तक को प्रथम पृष्ठ से पढ़ते जायें। क्रमशः अंतिम पृष्ठ तक पढ़ते जाएं। तभी पुस्तक श्मकानों के जंगल में तितलीश् पढ़ने के सही मायने प्राप्त हो सकते हैं। सारी ही कविताएं बहुत ही सरल शैली में हैंए जो आम.जन की समझ में आने वाली कविताएं हैं। प्रस्तुत कविताएं पाठक के सीधे हृदयए मन.मस्तिक पर अच्छा असर करती हैं। इन कविताओंए गीतए ग़ज़ल से निश्चित ही पाठकों का हृदय परिवर्तन होगाए तत्पश्चात व्यक्ति एक अच्छा नागरिक एक अच्छा व्यक्ति बनेगा। पुस्तक का सार कुछ शब्दों में इतना भर है कि श्माँ ही सबसे बड़ा धर्म हैंश्। जन्म के समय शिशु और माँ का एक साथ रोनाए शिशु और माँ का एक साथ दर्द यही सीख देता है कि अब और संतान नहीं। तभी दुःखों का अंत है। ये धरतीए ये कायनात भयानक सराय है। ये धरती रैन बसेरा है। जोशीमठ शहर की ज़मीन धंस रही है। मकानोंए सड़कए पहाड़ोंए खेतों में बड़ी.बड़ी दरारें आ गई हैं। भूकम्प से सीरियाए तुर्की के बड़े.बड़े भवन के नीचे लोग दबकर मर गये। इंसान के लिए ये बड़े दुःख की बात है कि शेर शेर का शिकार नहीं करता हैए लेकिन इंसान इंसान का शिकार करता है। ये दुःख की बात है। ये ही यथार्थवाद है। ये ही realism है।