अंजुम रहबर ने गीत ग़ज़लों के साहित्यिक एवं मूल्यात्मक क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बना ली है I उनकी रचनाओं में जहां वैयक्तिक अनुभूतियों की मिठास कड़वाहट और रोज़मर्रा की ज़िन्दगी का रसपूर्ण मिश्रण है वहीं आज के सामाजिक सांस्कृतिक एवं राजनितिक विकृतियों और विद्रूपताओं की भी मार्मिक अभिव्यक्ति है I उनके गीत और ग़ज़लें यद्यपि परंपरागत रूप से भी संयुक्त हैं तथापि वे नवगीत और आधुनिक ग़ज़ल की समस्त विशेषताओं को भी अपने आप मैं सिजोये हुए हैं I भावानुरूप भाषा और नए बिम्बों की मनोहारी छवि उनकी रचनाओं को जन-जन का कण्ठहार बनाती है I प्रस्तुत संग्रह की रचनाएं जीवन और जगत के अनेक रूपों और रंगों का मणि दर्पण हैं I निश्चित ही जो भी पाठक इन रचनाओं में झांकेगा उसे अवश्य ही अपना और अपने समाज का कोई-न-कोई रूप अवश्य दिखाई देगा I
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