Man Ka Panna Man Ki Qalam


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About The Book

प्रस्तुत पुस्तक में कवि अपनी रचनाओं के माध्यम से अपने मन की भावनाओं को कलमबद्ध करके कोरे कागज पर उतारना चाहता है। भावनाओं के सागर में जब भी वह डुबकी लगाता है तो उसकी कोई न कोई भाव प्रधान मन की संवेदनाओं को छूती रचना कोरे कागज़ पर उतर कर अपने पाठकों के मन तक पहुंचने का प्रयास करती है। जैसे कहीं उनमें बेरोजगारी का दर्द है तो कहीं उनमें अपने बीते दिनों की यादें सिमटी हैं तो कहीं पर छोटी-छोटी रचनाएं समाज एवं देशवासियों को सकारात्मक संदेश भी देती हैं। वहीं बीच-बीच में कहानियों के माध्यम से उनमें एक ऐसा संदेश है जो रिश्तों को नयी ऊर्जा से भर देता है। कभी-कभी लेखक को अपने बचपन के दिन याद आते हैं कभी-कभी उसके मन में ऐसे सवाल उठते हैं जिनका हल वह लिखकर स्वयं खोजना चाहता है। उसकी कविताओं में कहीं न कहीं एक चाहत दिखती है। जैसे वह किसी को बहुत अधिक प्रेम करता है। एक ऐसा प्रेम जिसकी प्रतीक्षा उसे आज तक है। कवि ने सामाजिक ताने-बाने को लेकर अपनी भावनाओं को लेखनी के माध्यम से कागज पर उतारने का प्रयास किया है। रचनाकार को किसी की मुस्कुराहट बहुत अच्छी लगती है तभी तो उसने मुस्कुराहट पर काफी कुछ लिखने का प्रयास किया है जैसे कि पहले तुम हमको देखकर हँस देते थे अब क्यों नहीं मुस्कुराते हो। इसके साथ-साथ कवि का जीवन जैसे-जैसे आगे बढ़ा लेखन को लेकर अनेक बाधाएं आयीं लेकिन रचनाकार ने अपना उत्साह कम नहीं होने दिया। वह कलम को सीने से लगाकर देश; समाज; प्रेम और अध्यात्म पर तुकांत अतुकांत एवं सुघड़ रचना करने का प्रयास करता रहा है। अब ऐसे में उसे इंतजार है अपने प्यारे पाठकों के अनुपम प्रेम का।
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