‘मन के आसमान पर कुलबुलाती कविताएं’ अपना दूसरा काव्य संग्रह आपके हाथों में सौंपते हुए प्रसन्नता हो रही है और मैं सुखद संतोष से भरा हुआ हूँ। यह आधुनिक तौर-तरीके की कविताएं हैं और अब तक के मेरे सम्पूर्ण जीवन काल में लिखी हुई हैं। स्वाभाविक है इनमें प्रवाह भाव-संवेदनाएं शब्द चयन आदि को लेकर एकरूपता नहीं मिलेगी बल्कि कोई बिखराव या विस्तार दिखाई देगा। इसे सुधी पाठक गण मेरा गुण भी मान सकते हैं या काव्य-विधागत दोष भी। सब शिरोधार्य है और सबका हृदय से स्वागत है।- विजय कुमार तिवारी
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