<b>About the Book:- </b><br> <br> डूबते को तिनके का सहारा मिल गया। कल्पना के पंख को फैलाने का जरिया मिल गया। लगता है बरसों के बाद ज़िंदगी फिर से जीने का जरिया मिल गया। अब तो पूरा खुला आसमान अपना सा लगता है। ऊँची उड़ान पर निकाल लूं बस दिल अब यह करता है। मन के अंदर जो भी कुछ अनकहीं बातें थीं उन्हें सबसे बताने का जरिया मिल गया। अब तो हम आम से खास हो गए। इस तरह हम महफिलों की शान हो गए। पहले मैं एक आम नारी थी जो बेटी बहू और मां का रोल निभाती थी जिसके मन के स्वर कहीं खो गए थे। फिर फुर्सत मिली तो जाना कौन हूं मैं अपनी ही कहानी का अनकहा किस्सा हूं मैं जिससे आप सबका मिलना है। तसल्ली से पढ़ें तो समझ आएंगे। क्या किस्सा हूं मैं बिना पंक्त देन।ा यह मन के स्वर का किस्सा है एक जिसके स्वर को बहुत शिद्दत से पिरोया है मैंने इसमें ईश्वर देश भक्ति और प्रेम का समावेश किया है। मैंने आशा है बात आपके दिल तक पहुंचेगी जिससे आप जुड़ाव महसूस करेंगे।<br> <br> - मानसी (मन्नु)<br> <br> <b>About the Author:<br> श्रीमती मानसी कपूर</b> (मन्नु) जिनका जन्म स्थान शिकोहाबाद जिला फिरोजाबाद है। बचपन से ही उन्हें पेंटिंग एवं कढ़ाई का शौक रहा है।<br> <br> स्कूल के दिनों में इन्होंने कई गायन प्रतियोगिताओं में भाग लिया है। बचपन में इनका नाम मन्नु मेहरोत्रा था जो की शादी के बाद बदलकर मानसी कपूर हो गया। शादी के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण यह अपने अंदर छिपी प्रतिभा को बाहर या समाज के सामने नहीं ला सकी।<br> <br> लेकिन एक दिन यकायक सोशल प्लेटफॉर्म पर इन्होंने फिल्म अभिनेत्री भाग्यश्री की एक पोस्ट देखी जिसमें उन्होंने बच्चों के बड़े होने के बाद फिर से खुद के लिए जीने के बारे में बताया। इससे इनको बहुत प्रेरणा मिली। एवं लिखने की प्रक्रिया को शुरू किया। उनकी रचनाओं में मौलिकता भोलेपन समर्पण सादगी एवं प्रेम है जो एक आम जन को अपने आप जोड़ लेती है।
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