हर किसी के ज़ेहन में कुछ ख़यालात पनपते हैं लेकिन वो कुछ ही लोग होते हैं जो उन ख़यालात को एक ख़ूबसूरत सी पंक्ति में ढालकर उन्हें पन्नों पर उकेरने का हुनर रखते हैं। ऐसे लाखों हुनरमंद हैं जिनकी सुन्दर सोच ने एक गीत कविता शेर या ग़ज़ल का रूप ले तो लिया है लेकिन वो अभी भी या तो उनके लैपटॉप में या फिर किसी डायरी के पन्नों तक ही सिमटकर रह गई है। इस काव्य-संग्रह के बहाने हमने कोशिश की है कुछ ख़ूबसूरत रिश्तों को पास लाने की और एक वादा अपने पाठकों से जो कुछ वक़्त पहले किया था उसे निभाने की।