Man Madhukar Khelat Vasant (मन मधुकर खेलत वसन्त) & Piv Piv Lagi Pyas (पिव पिव लागी प्यास)
Hindi

About The Book

मन मधुकर खेलत वसन्त :जब हम ओशो के साहित्य को देखते है तो चमत्कृत रह जाते हैं क्योंकि उसमें चैतन्य है इसीलिए हमें चमत्कार लगता है। हमें लगता है कि हममें भी अभी प्राण है। उस चेतना की प्रखर लहर पर बहाते हुए वे हम ले जाते हैं यही उनका जादू है। -डॉ. बलदेव वंशीपिव पिव लागी प्यास :मन चित चातक ज्यूं रटै पिव पिव लागी प्यास। नदी बह रही है तुम प्यासे खड़े हो; झुको अंजुली बनाओ हाथ की तो तुम्हारी प्यास बुझ सकती है। लेकिन तुम अकड़े ही खड़े रहो जैसे तुम्हारी रीढ़ को लकवा मार गया हो तो नदी बहती रहेगी तुम्हारे पास और तुम प्यासे खड़े रहोगे। हाथ भर की ही दूरी थी जरा से झुकते कि सब पा लेते। लेकिन उतने झुकने को तुम राजी न हुए। और नदी के पास छलांग मार कर तुम्हारी अंजुली में आ जाने का कोई उपाय नहीं है। और आ भी जाए अगर अंजुली बंधी न हो तो भी आने से कोई सार न होगा। शिष्यत्व का अर्थ है: झुकने की तैयारी। दीक्षा का अर्थ है: अब मैं झुका ही रहूंगा। वह एक स्थायी भाव है। ऐसा नहीं है कि तुम कभी झुके और कभी नहीं झुके। शिष्यत्व का अर्थ है अब मैं झुका ही रहूंगा; अब तुम्हारी मर्जी। जब चाहो बरसना तुम मुझे गैर-झुका न पाओगेओशो पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदु* भक्ति की राह में श्रद्धा की अनिवार्यत*प्रेम समस्या क्यों बन गया है* धर्म और नीति का भे* समर्पण का अर्* शब्द से निःशब्द की ओर.
Piracy-free
Piracy-free
Assured Quality
Assured Quality
Secure Transactions
Secure Transactions
Delivery Options
Please enter pincode to check delivery time.
*COD & Shipping Charges may apply on certain items.
Review final details at checkout.
downArrow

Details


LOOKING TO PLACE A BULK ORDER?CLICK HERE