यह पुस्तक विश्व की महान साहित्यकार अमृता प्रीतम की तकरीरों यानी कि उनके भाषणों का अनूठा संकलन है। यह भाषण समय के साक्षी हैं और अमूल्य दस्तावेज भी हैं और अमृता के अंदाजे बयां की खूबसूरत बानगियां भी हैं। अमृता ने इस पुस्तक के बारे में स्वयं लिखा है कि अपने-अपने भीतर का सत्य तो अपने-अपने भीतर से पाना होता है और वह सत्य शब्दों में नहीं उतरता अनुभव में उतरता है।