मनसीरत शहद-बूँद काव्य -संग्रह मेरी प्रथम साहित्यिक पद्य कृति हैजो कि मेरी अथक मेहनत और प्रयास का फल है जिसमें मैनें मेरे मन में उठ रही देशभाषाप्रेमजीवन-दर्शन और सामयिक आदि विषयों से संबंधित उमंगोंतरंगों और भावनाओं को शब्द रूपी मोतियों में ढाल कर काव्य रूपी माला में पिरोने का प्रयास किया है।पुस्तक का शीर्षक मेरी तीन वर्षीय नन्ही परी के नाम मनसीरत कौर से प्रेरित है। पेशे से अंग्रेजी भाषा के प्रवक्ता होने के नाते मेरी हिन्दीअंग्रेजी एवं पंजाबी भाषा के साहित्य के अध्ययन-अध्यापन में गहन रूचि है। जब जब हृदय व्याकुल एवं भावुक होता हैतो मन में सरिता की भान्ति भाव बहने लगते हैं और हृदय पटल पर विभिन्न विषयों पर उठ रही इन्हीं भावनाओं अंतर्द्वंद्वों एवं व्याकुलता को शब्दों का रूप देकर काव्य के माध्यम से व्यक्त करने का मैंने एक छोटा सा प्रयास किया है। प्रथम काव्य कृति एवं पहला अनुभव होने के कारण पुस्तक में कुछ त्रुटियां होनी स्वाभाविक है।आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि आप मेरी खामियों को दरकिनार करते हुए मुझे प्रोत्साहित करते हुए ओर अधिक अच्छे लेखन कार्य हेतु प्रेरित करेंगे ताकि भविष्य में आपकी गद्य औंर पद्य के रूफ में साहित्यिक सेवा कर सकूं।मेरे इस साहित्यिक कार्य में मेरी धर्मपत्नी श्रीमति कमलेश (कमल) मोहीपिता श्री गुरमीत सिंह सेवानिवृत्त मुख्य शिक्षकमाता स्व.श्री मति मनजीत कौर जी के विशेष योगदान हेतु मैं उनका बहुत आभारी हूँजिन्होनें कदम-कदम पर मेरा पूर्ण सहयोग किया। मैं अपने गुरुजनोंपरम मित्रोंसहयोगियों एवं साथियों का तय दिल से धन्यावाद करता हूँ जिनके सहयोग एवं मार्गदर्शन के अभाव में यह साहित्यिक कार्य संभव नहीं था। ऋणी हूँ मैं अपनी जन्मस्थली गाँव खेड़ी राओ वाली (कैथल) की माटी का जहाँ पर मैंने जन्म लिया और जवाहर नवोदय विद्यालय तितरम (कैथल) काजहाँ मैंने अपनी वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा पूर्ण की। अंत में मैं उम्मीद करता हूँ कि आप मेरी काव्य कृति को पसंद करते हुए मेरी हौंसला अफ़ज़ाई करेंगे।