Mann Aangan ? ?? ????

About The Book

लेखिका गरिमा वर्मा के इस कहानी संग्रह में उनके बचपन के दिनों में पुश्तैनी घर के आँगन में बसे मन की कहानियाँ संकलित हैं। यानी अस्सी के दशक के एक संयुक्त परिवार के आँगन की कहानियों का यह संगह है। हर सुबह आँगन के कोलाहल से कहानी शुरू होती है। आँगन ही हर कहानी का मुख्य पात्र है। वो आँगन जिंदगी के विभिन्न चरणों का गवाह है जिसमें होली के त्यौहारी हुड़दंग से लेकर शादी-ब्याह की पारंपरिक खुशियाँ आदि शामिल हैं। बच्चे का मुंडन हो या फिर किसी बुजुर्ग की अर्थी उठने का दुख हो इस आँगन ने अपने सभी कोनों से सब कुछ देखा-सुना है। दादी-नानी की डाँट और माँ-बाउजी का प्यार हो या फिर चाचा-ताऊ की धौंस हो आँगन में खड़े हैंडपंप ने सब सहा है और अपने प्रिय साथी आँगन को सब बताया है। अचार-पापड़ के लिए बिछाई गई साड़ी से रिसती खुशबू को आँगन की मिट्टी ने खूब चखा है इसलिए भी आँगन से बिछड़ने वाले को देखकर वह अक्सर रो पड़ता है। लेकिन समय हमेशा एक जैसा तो होता नहीं इसलिए आँगन का भी समय पूरा हो गया और सब घटनाएँ हसीन यादों की कहानियाँ बनकर रह गईं। इन कहानियों में नॉस्टेल्जिक जीवंतता तो है ही कल्पनाओं की अठखेलियाँ भी हैं। गरिमा ने इस ‘मन आँगन’ को एक धरोहर की संज्ञा दी है। जाहिर है आज के इस पूँजीवादी और पल-पल नवनिर्मित होती दुनिया में पुरखों की विरासत को सँभालना बहुत मुश्किल है। लेकिन कहानियाँ यह काम कर सकती हैं। लेखिका ने अपने मन के कोनों में छुपे उन शब्दों को तारतम्य देकर कहानियों की शक्ल दी है।.
Piracy-free
Piracy-free
Assured Quality
Assured Quality
Secure Transactions
Secure Transactions
Delivery Options
Please enter pincode to check delivery time.
*COD & Shipping Charges may apply on certain items.
Review final details at checkout.
downArrow

Details


LOOKING TO PLACE A BULK ORDER?CLICK HERE