मानव मस्तिष्क क्या क्या काम करता है यह बात मोटे तौर पर हम सभी जानते हैं। इस पुस्तक के एक अध्याय में सरल एवं रोचक भाषा में मैंने मस्तिष्क के इन विभिन्न क्रियाकलापों को विस्तार देने का प्रयास किया है। विज्ञान के क्षेत्र में निरंतर नई ऽोज हो रही हैं लेकिन मस्तिष्क का यह विज्ञान अभी तक अपनी शैशवावस्था में ही है।... वैज्ञानिकों एवं चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न चिकित्सकों द्वारा नित नई ऽोज की जा रही है और मनुष्य ज्ञान के अपने भण्डार में निरंतर वृद्धि कर रहा है। मस्तिष्क के बारे में जैविकीय दृष्टि से जानकारी देना यहाँ मेरा उद्देश्य नहीं है फिर भी मैंने मस्तिष्क के क्रियाकलापों को तथ्यात्मक जानकारी के साथ आम आदमी की भाषा में यहाँ प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। हम अपने जिस अंग का हर क्षण उपयोग करते हैं उसके बारे में जानना अरुचिकर तो हो नहीं सकता। जिस अवचेतन में मनुष्य जाति के अब तक के तमाम अनुभव उपस्थित हों उसे न जानने का भी कोई औचित्य नहीं हो सकता। जिस ‘मन’ शब्द का हम अपने जीवन में अनेक बार प्रयोग करते हैं वह वस्तुतः हमारे मस्तिष्क के समस्त क्रियाकलापों का योग ही है। मस्तिष्क यदि हमारे शरीर का हार्डवेयर है तो हमारा मन उसका सॉफ्रटवेयर है। लेकिन हम अपने मस्तिष्क को अभी तक एक मशीन ही समझते रहे और मन के कार्यों को करते हुए भी उससे अनभिज्ञ रहे। इस मशीन का उपयोग कर हम विकास के स्तर पर तो बहुत आगे बढ़ गए लेकिन अपने अवचेतन का परिष्कार नहीं कर पाए। हम नहीं जान पाए कि हमारे सामूहिक अवचेतन में हमारे पूर्वजों द्वारा क्रमिक विकास के दौरान अर्जित भाषा भोजन जीवन शैली एवं श्रम से सम्बंधित ज्ञान के साथ साथ मनुष्य के शोषण और पीड़ा की भी अकथ गाथा भी संचित है।