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About The Book
Description
Author
समय निरंतर बढ़ता रहता है और इसी समय मे सभी जीवन जी रहे है। सांसारिक क्रिया कालापों मे मानव उलझ कर रह गया है फिर भी कहीं-ना-कहीं उसके अंदर बैराग या विरक्ति का भाव उभर कर मन में आता है। तब वह डूब जाता है भक्ति भजन और वंदना करने में ताकि मन को एकाग्रचित्त कर सके।ऐसे ही बड़े-बड़े संत साधु महात्मा अध्यात्म गुरुओं ने स्तुति बंदना के माध्यम से आनंद को पुनः प्राप्त कर जीवन चक्र पूर्ण करने का मार्ग बताया है।ऐसे ही सुन्दर गीत काव्य भजन अध्यात्म वंदना का एक सुन्दर संग्रह है जो मन को छू ले और आप रम जाएगे। मन में एक नयी ऊर्जा का संचार होगा जो सांसारिक जीवन में प्रेणानादायी होगा।