Manto Dastavej : Vols. 1-5

About The Book

समय के साथ कितनी ही हकीकतें फरेब बन जाती हैं और कितने ही ख्वाब सच्चाई में ढल जाते हैं-समय न तो अंधेरों की निरंतरता है न इतिहास और सभ्यता के किसी अनदेखे रस्ते पर एक अंधी दौड़ ! इन सबके विपरीत समय एक तलाश है बोध है विजन है और एक कर्मभूमि ! समय की कोई सीमा अगर कायम की जा सकती है और अगर उसे एक नाम दिया जा सकता है तो वह नाम ‘आदमी’ है ! आदमी की बुनियादी समस्या पाषाण युग से मंटो और मंटो के पात्रों तक एक ही रही है : कोई रौशनी कोई रौशनी.. रौशनी के लिए नई रौशनी की खातिर नित-नई रौशनी की तलाश में आदमी ने सदियों का सफ़र तै किया और आज भी सफ़र में है ! इसी निरंतर और अधूरे सफ़र का एक पड़ाव मंटो है ! मंटो की तलाश और खोज के हवाले से इस कोशिश का मुनासिब और सटीक नाम ‘दस्तावेज’ के अलावा सोचा भी नहीं जा सकता !
Piracy-free
Piracy-free
Assured Quality
Assured Quality
Secure Transactions
Secure Transactions
Delivery Options
Please enter pincode to check delivery time.
*COD & Shipping Charges may apply on certain items.
Review final details at checkout.
downArrow

Details


LOOKING TO PLACE A BULK ORDER?CLICK HERE