Manushya shreer me ishwar ka vigyanmay rahasya


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About The Book

About the Book: मनुष्य शरीर में ईश्वर का विज्ञानमय रहस्य यह किताब विज्ञान से परिपूर्ण है। आत्मज्ञान जिसका एक अंश वैज्ञानिक ज्ञान भी है वह हमारी आत्मा में ही बसा है और आत्मा तो स्वयं आदिशक्ति हैं सब विद्याओं कलाओं गुणों की धनी है। वैज्ञानिक रहस्य जो आम मानव से कोसों दूर हो गए हैं उनकी प्राप्ति का मार्ग व सुझाव इसमें बताया गया है। हमारे प्रभु ने मानव शरीर नमक यंत्र बनाया। इसकी प्राप्ति जिस हेतु हुई थी उसको हम सभी ने भुला दिया और स्वयं इतनी महान शक्ति होते हुए हमने अपने परिचय को नकार दिया। जब आप किताब पड़ेंगे तभी इसका अर्थ जान पाएंगे कि कैसे ईश्वर मनुष्य शरीर में विज्ञानमय ढंग से छिपा है। मानव जन्मों से बहुत कुछ जुटाने में व्यस्त रहा है 70- 80 वर्ष का जन्म सब कुछ पाने में लगा देता है किंतु सबसे महत्वपूर्ण कोई था जो उसके सबसे नजदीक था उसपर कभी ध्यान न दिया।About the Author: नीना शर्मा अध्यात्मिक दार्शनिक विशेषज्ञ। तन से एक सामाजिक नारी का दायित्व निभाते हुए योग अध्यात्म में एक सौभाग्यशाली शिष्य के बाद एक मार्ग दर्शक एवं गुरु बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ जिसके माध्यम से भटके समाज की सेवा करने का आनंद प्राप्त होता है। गुरुदेव ने हमारे घट की ज्योत जलाकर धन्य किया और उसके बाद स्वयं हनुमंत जी का मार्ग दर्शन प्राप्त हुआ। इसी यात्रा में घट में विराजमान मां गायत्री ने भीतर ऋग वेद का प्रकाश किया। हमने कभी पड़ा नही था ऋग वेद किंतु भीतर घटित होने के पश्चात जब बाहर किताब रूप में पढ़ा तो अपने अध्यात्मिक अनुभवों और ऋग वेद के संदेश में कोई अंतर नही दिखा दोनो समान थे। आज ईश्वर कृपा से इस यात्रा में एक शिष्य होने के बाद अब हमें भी किसी का गुरु होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
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