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About The Book
Description
Author
भावों की प्रवणता मौन को मुखर कर देती है। धीरे-धीरे शब्दों का समूह आकार ले सृजन करता है काव्य-धारा का। जिसमें समाहित है सम्पूर्ण सृष्टि। साँसों-उसाँसों की डोर से निर्मित जीवन हर क्षण मानवीय संवेदना का सूक्ष्म जाल हैं। मन-मस्तिष्क में उमड़ते-घुमड़ते भावनाओं के जलद जब शब्द रूपी मौक्तिक-कण लेखनी में उतरते हैं तो काव्य-जगत का प्राकटड्ढ होता है। सत्य है सम्पूर्ण जीवन पलों की पूँजी है और पल क्षणभंगुर है प्रत्येक पलों में भिन्नता है। इसी प्रकार हर पल कवि-हृदय में भावों की कई लहरें उठती-गिरती हैं। अंतर्निहित भावनाओं में उद्वेलन होता है और वे शब्दों का रूप ले काव्य का सृजन करते हैं। कविता भावों की वह अभिव्यक्ति है जिसका सारोकार तत्कालीन समाज एवं परिवेश से होता है। बदलते समय के साथ-साथ भावाभिव्यक्ति एवं विचार धारा में भी परिवर्तन आना स्वाभाविक है क्योंकि कवि समाज का अभिन्न अंग है। --अनीता