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Description
Author
ओशो स्वयं तूफानों के पाले हुए थे।और उनका अक्षर-अक्षर मुहब्बत का दीया बनकरउन तूफानों में जलता रहा...जलता रहेगा।जिस ओशो से मैंने बहुत कुछ पाया है यह अक्षर उन्हीं के नाम-अर्पित करती हूं-कह दो मुखालिफ हवाओं से कह दोमुहब्बत का दीया तो जलता रहेगा..'