<p>मीरा: मेरी प्यारी गुड़िया लेखक की उन यादों का पुलिंदा है जिसमे उसने अपनी प्रेमिका के चले जाने के बाद भी प्रेम की पुलक बनाए रखी है और उसकी स्मृति को यू सजों रखा है मानो वो कही गई ही न हो लेखक ने बारंबार अपनी प्रियशी को न सिर्फ़ पुकारा हैं यद्धपि उसे अपनी कविताओं के माध्यम से फिर से जीवित करने की कोशिश की हैं ये कविताएं लेखक ने अपनी प्रियसी को समर्पित की हैं साथ ही साथ लेखक ने समाज के कुछ वर्गों पुरानी प्रथाओं और परम्पराओं एवम ईश्वर से भी कुत्सित होकर कुछ सवाल किए हैं l<p><p>लेखक वियोग के क्षण में अपने आप को ढाढस बांधता रहता है फिरभी खुद रोता है टूटता हैं लेकिन उन क्षणों में भी अपनी कविताओं के माध्यम से प्रेम की पुलक टूटने नहीं देता हैंl<p><p>अपनी कविताओं में भी लेखक कहता है - सपने टूटे अरमा टूटे बस तुम मत टूटना यहां लेखक इस बात पर जोर दे रहा हैं की प्रेम तुम्हे सभी तरह से तोड़ेगा कसौटियों पर कसेगा लेकिन तुम घबराना मत बस आगे बढ़ते जाना अपने आप को खूब निखारना और अपने को शुद्ध करते जाना उदार बने रहना यही प्रेम का मंत्र हैंl<p>