विषय पर केन्द्रित होते हुए संगृहीत रचनाओं पर आगे बात करें तो नागेन्द्र की कविता का कैनवस या फलक व्यापक है और इमेजिनरी इतनी जबर्दस्त कि उनकी भरसक ही किसी कविता को आप पूरी पढ़े बिना रह पाएं। सामाजिक सजगता एवं चेतना की कविता में व्यंग्य का निवेश एक जरूरी तत्व के रूप में होता है। यह नागेद्र के यहाँ भी है। कवि की समाज-संलग्नता का पता भी तो प्रथम दृष्टया उनकी कविता ‘मेहतरों के चार घर’ को कवि द्वारा महत्व देना ही दे जाती है जो इस संग्रह का नाम भी बना है। हालाँकि शिल्प के ख्याल से यह बहुत मजबूत कविता नहीं है।--मुसाफिर बैठा